जन-गण-मन एक सिलसिला है — मन, वचन और कर्म से संविधान के मूल्यों की रक्षा का मार्ग है। यह ना कोई लीडरशिप ट्रेनिंग नहीं है, ना ही कोई सर्टिफिकेट वाला कोर्स। यह सार्वजनिक जीवन में गहरी सोच, संजीदा संवाद और हस्तक्षेप का निमंत्रण है।
आवेदन की आखरी तिथि : 10 मार्च 2026
यह सिलसिला शुरू होगा पाँच हफ़्ते की ऑनलाइन संगत से, अप्रैल के पहले हफ़्ते से मई के पहले हफ़्ते तक। चुने गए सहचर — हर हफ़्ते दो सत्रों में भाग लेंगे: एक संगत सत्र योगेन्द्र यादव के साथ, और एक छोटे मंडल में चर्चा अनुभवी कार्यकर्ताओं और विचारकों के साथ। हर सत्र लगभग दो घंटे का होगा। इसके अतिरिक्त हर हफ़्ते चार से छह घंटे पढ़ना और तैयारी करनी होगी। यानी हर हफ़्ते लगभग दस घंटे पढ़ने, सोचने और गंभीर संवाद में लगाने होंगे।
इन्हीं सहचरों में से कुछ को रूबरू सत्संग के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस कड़ी में पहले समूह को हिमाचल प्रदेश में जून के पहले हफ़्ते में नौ दिन के रूबरू सत्संग के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस सत्संग में योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण सहित देश के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई वरिष्ठ साथी शिरकत करेंगे।
अगर आपको अपनी छवि निखारने, अपना नेटवर्क बढ़ाने या कैरियर बनाने की चिंता है तो जन-गण-मन आपके लिए नहीं है। यह माँगता है समय, संजीदगी और संकल्प। यहाँ आपको मिलेगा संवाद का मौक़ा, स्वाध्याय का अवकाश और मिलेंगे सहमाना साथी। अगर आपको नाज़ है हिन्द पर। अगर आपके दिल और दिमाग़ में बेचैनी है। अगर आप इस मार्ग पर चलने को तैयार हैं, तभी आवेदन करें।
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आवेदन की आखरी तिथि : 10 मार्च 2026
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FAQ: कुछ सवाल जो आपके मन में हो सकते हैं
कोई भी कर सकता है। उम्र की कोई पाबंदी नहीं है, हालाँकि हम उम्मीद करते हैं कि ज़्यादा संख्या युवाओं की होगी। जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र — इनमें से कोई भी चयन का आधार नहीं है। हमें विविधता पसंद है। डिग्री या बड़े संस्थान से पढ़ाई होना ज़रूरी नहीं है। ज़रूरी यह है कि आप पढ़ सकें, सोच सकें और सीखने — और ज़रूरत पड़े तो अपनी धारणाएँ बदलने — को तैयार हों।
नहीं। जन-गण-मन किसी पार्टी, संगठन या “वाद” से जुड़ा नहीं है। संविधान के मूल्यों के अलावा किसी और विचारधारा की शर्त नहीं है। आप किसी संगठन से जुड़े हों या न जुड़े हों — फर्क नहीं पड़ता। बस इतना जरूरी है कि आप ईमानदारी से अपनी पृष्ठभूमि बताएं। यहाँ आने का मतलब किसी नए खेमे में शामिल होना नहीं है।
हर हफ़्ते लगभग 10 घंटे देने होंगे — दो सत्र (लगभग दो-दो घंटे) और 4–6 घंटे पढ़ने-तैयारी के। ज़्यादातर लोग अपनी पढ़ाई या नौकरी के साथ इसे संभाल सकते हैं, लेकिन अगर आपका समय पहले से ही बहुत भरा हुआ है तो सोच-समझकर आवेदन करें। यह जगह “चलता है” वाले रवैये के लिए नहीं है। यहाँ ध्यान और गंभीरता दोनों चाहिए।
फिलहाल हिंदी और अंग्रेज़ी — बस यही दो माध्यम हैं। आप इनमें से किसी एक में सहज होकर पढ़ और बोल सकें, इतना काफी है। समूह आपकी भाषा-प्राथमिकता के आधार पर बनाए जाएंगे ताकि बातचीत स्वाभाविक रहे, अनुवाद की मजबूरी न बने।
नहीं। इसमें भाग लेने का कोई शुल्क नहीं है। अगर आप हिमाचल में होने वाले सत्संग के लिए चुने जाते हैं तो यात्रा की व्यवस्था आपको करनी होगी। अगर आर्थिक कारण से कठिनाई हो तो हमें बताइए — हम कोशिश करेंगे कि रास्ता निकले। पैसे की वजह से कोई पीछे न रहे, यह हमारी कोशिश रहेगी।
जन-गण-मन में अनुभवी कार्यकर्ता और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग साथ रहेंगे। ऑनलाइन व्याख्यान–संवाद सत्र योगेन्द्र यादव के साथ होंगे, और छोटे समूहों की चर्चा अलग-अलग साथी संचालित करेंगे। हिमाचल के सत्संग में योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण सहित कई सार्वजनिक हस्तियाँ सहभागी होंगी। लेकिन यह मंच भाषण सुनने का नहीं, संवाद करने का है।
सीधे शब्दों में — नहीं। यह न तो नारे बनाने की कार्यशाला है, न आंदोलन चलाने की त्वरित ट्रेनिंग। यहाँ सोच और कर्म के रिश्ते को समझने की कोशिश होगी। अगर आप तुरंत सड़क पर उतरने की रणनीति ढूँढ रहे हैं, तो शायद यह जगह आपके लिए नहीं है। अगर आप लोकतांत्रिक आचरण की गहराई समझना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए हो सकती है।